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देवीधुरा में ऐतिहासिक बग्वाल मेले का भव्य आयोजन, CM धामी ने माँ वाराही के दर्शन कर लिया आशीर्वाद

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देवीधुरा में ऐतिहासिक बग्वाल मेले का भव्य आयोजन, CM धामी ने माँ वाराही के दर्शन कर लिया आशीर्वाद

✍️ By: N24NewsLive 📍 देवीधुरा, चम्पावत 🕒 उत्तराखंड न्यूज़
चम्पावत/देवीधुरा। विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ माँ वाराही धाम देवीधुरा में ऐतिहासिक बग्वाल मेले का भव्य आयोजन हुआ। रक्षाबंधन के पावन अवसर पर आयोजित इस प्रसिद्ध मेले में आस्था, परंपरा, संस्कृति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला।

हेलीकॉप्टर से देवीधुरा पहुंचे मुख्यमंत्री धामी

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बग्वाल मेले में प्रतिभाग करने के लिए हेलीकॉप्टर से देवीधुरा हेलीपैड पहुंचे।

हेलीपैड पर कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, जिलाधिकारी मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक रेखा यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया।

मुख्यमंत्री के स्वागत में पारंपरिक उत्तराखंडी लोकनृत्य छोलिया की मनमोहक प्रस्तुति भी दी गई।

माँ वाराही देवी की विधिवत पूजा-अर्चना

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शक्तिपीठ माँ वाराही देवी की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।

मुख्यमंत्री ने सभी प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि माँ वाराही मइया सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें।

“देवीधुरा की यह पावन भूमि और ऐतिहासिक बग्वाल उत्तराखंड की अगाध आस्था, समृद्ध लोक-संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता का जीवंत प्रतीक है।”

‘विकास भी और विरासत भी’ के संकल्प पर सरकार

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक विकास के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों, लोक परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि विकास को केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं रखा जा रहा है, बल्कि धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।

मानसखंड मंदिर माला मिशन के तहत विकास

मुख्यमंत्री ने कहा कि मानसखंड मंदिर माला मिशन के अंतर्गत कुमाऊँ क्षेत्र के प्रमुख पौराणिक और धार्मिक स्थलों का कायाकल्प किया जा रहा है।

🏛️ देवीधुरा क्षेत्र में प्रमुख विकास कार्य

  • 4.27 करोड़ रुपये की लागत से गढ़वाल खाम भवन का निर्माण कार्य।
  • 4.57 करोड़ रुपये की लागत से रणकोची मंदिर के पुनर्निर्माण का कार्य।
  • घटोत्कच मंदिर का सौंदर्यीकरण।
  • घटकु हिडिंबा मंदिर का निर्माण।
  • सप्तेश्वर महादेव मंदिर में स्नानघाट का निर्माण।
  • लधौनधुरा मेला स्थल का सौंदर्यीकरण।

68.58 करोड़ रुपये की लागत से हुए 397 कार्य

मुख्यमंत्री ने बताया कि विगत पांच वर्षों में धार्मिक अवस्थापना और सौंदर्यीकरण के तहत 68.58 करोड़ रुपये की लागत से कुल 397 कार्य किए गए हैं।

  • घटोत्कच से झालिमाली मंदिर मार्ग के डामरीकरण पर 1.95 करोड़ रुपये।
  • विभिन्न मंदिरों के सौंदर्यीकरण के लिए 4.70 करोड़ रुपये।
  • पूर्णागिरि मार्ग पर 5 करोड़ रुपये की स्ट्रीट लाइट परियोजना।
  • पाताल रुद्रेश्वर सहित कई धार्मिक स्थलों पर विकास कार्य।

देवीधुरा को नगर पंचायत बनाने की बात

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देवीधुरा को नगर पंचायत क्षेत्र बनाने की बात कही। उन्होंने क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाओं का उल्लेख किया।

🚗 बड़ी घोषणा:
देवीधुरा में लगभग 9.80 करोड़ रुपये की लागत से मल्टी लेवल पार्किंग का निर्माण कार्य शीघ्र कराया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बग्वाल मेले को राजकीय मेला घोषित कर इसकी गरिमा बढ़ाने के साथ-साथ व्यवस्थाओं को भी और अधिक मजबूत किया गया है।

धार्मिक पर्यटन से बढ़ेगा रोजगार

मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक पर्यटन का मुख्य उद्देश्य स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना तथा रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना है।

  • स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
  • स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
  • स्थानीय व्यापार को मजबूती मिलेगी।
  • उत्तराखंड की संस्कृति और विरासत को बढ़ावा मिलेगा।

चार खाम-सात थोक के बीच खेली गई ऐतिहासिक बग्वाल

मुख्यमंत्री ने चार खाम और सात थोक के बीच खेले जाने वाले इस अनोखे प्राचीन आयोजन का अवलोकन किया।

रक्षाबंधन के अवसर पर बच्चियों और महिलाओं ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को राखी बांधकर पर्व की खुशियां साझा कीं।

पूजा-अर्चना के बाद शुरू हुई बग्वाल

पाटी विकासखंड स्थित माँ वाराही धाम में प्रधान पुजारी द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना के साथ बग्वाल की शुरुआत हुई।

इसके बाद चारों खामों के बग्वालियों ने पारंपरिक तरीके से मैदान में प्रवेश किया।

चार प्रमुख खाम

  • ⚪ वालिक खाम — सफेद
  • 🌸 चम्याल खाम — गुलाबी
  • 🟠 गहड़वाल खाम — भगवा
  • 🟡 लमगड़िया खाम — पीला

अलग-अलग रंगों के पारंपरिक वस्त्रों और पगड़ियों में सजे बग्वालियों के हाथों में बांस और रिंगाल से निर्मित ढालें थीं।

शंखनाद और माँ वाराही के जयकारों के बीच ऐतिहासिक बग्वाल का शुभारंभ हुआ।

फल और फूलों से खेली गई बग्वाल

फलों और फूलों की बरसात के बीच पूरा बग्वाल मैदान माँ वाराही के जयकारों से गूंज उठा।

⏰ बग्वाल का समय

दोपहर 1:48 बजे शुरू होकर
1:55 बजे समाप्त हुई

लगभग 8 मिनट तक चले इस अनूठे ऐतिहासिक आयोजन में फल और फूलों का प्रयोग कर सदियों पुरानी परंपरा को जीवंत रखा गया।

पीठाचार्य पंडित कीर्तिबल्लभ जोशी के अनुसार फल और फूलों से खेली जाने वाली बग्वाल को अत्यंत शुभ एवं फलदायी माना जाता है।

“माँ वाराही मइया सबकी चिंता करती हैं। यह अनोखी विरासत केवल देवीधुरा के बग्वाल मैदान में देखने को मिलती है। यहां की परंपरा अनुशासन और भाईचारे की मिसाल है।”

— मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

बग्वाल के बाद भाईचारे का संदेश

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवीधुरा की यह अनूठी परंपरा केवल आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि भाईचारे और सामाजिक एकता का भी संदेश देती है।

उन्होंने कहा कि बग्वाल के बाद सभी योद्धा आपस में गले मिलते हैं, जो सदियों से चली आ रही सामाजिक सद्भाव की परंपरा को दर्शाता है।

बड़ी संख्या में श्रद्धालु और जनप्रतिनिधि रहे मौजूद

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद अजय टम्टा, जिला पंचायत अध्यक्ष आनंद सिंह अधिकारी, माँ वाराही मंदिर समिति अध्यक्ष हीराबल्लभ जोशी सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी और श्रद्धालु मौजूद रहे।

N24NewsLive की नजर से:
देवीधुरा का ऐतिहासिक बग्वाल मेला उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, आस्था, अनुशासन और भाईचारे का अद्भुत उदाहरण है। सदियों पुरानी यह परंपरा आज भी देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को विश्व स्तर पर विशेष पहचान दिलाती है।
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